अहिल्या बाई की जीवनी – Biography of Ahilyabai Holkar in Hindi Jivani 2023

अहिल्या बाई जोकि इतिहास में एक ऐसी महिला रही जोकि मराठा साम्राज्य में पहली शासक बनी। अहिल्या बाई की जीवनी जानने के बाद आप भी चौंक जाओगे तो चलिए शुरु करते हैं….

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

अहिल्या बाई की जीवनी – Biography of Ahilyabai Holkar in Hindi Jivani

अहिल्या बाई की जीवन परिचय

अहिल्या बाई का पुरा नाम अहिल्या बाई खांडेराब होल्कर है जिनका जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर के एक छोटे से गाँव चौढी मे हुआ था और इनके पिताजी का नाम मान्कोजी शिंदे और माता जी का नाम सुशीला शिंदे थे

 

अहिल्याबाई का इतिहास जन्म स्थान

इनका जन्म महाराष्ट्र के गांव चौढी मे हुआ था इनके पिता जी मान्कोजी एक बहुत ही महान पुरुष थे जो अहिल्याबाई को हमेशा ही आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते थे उन्होंने बचपन से ही अहिल्याबाई को शिक्षा देना शुरू कर चुके थे आपको जानकर हैरानी होगी कि उस समय लडकियो को शिक्षा नही दी जाती थी बावजूद इसके इनके पिता उन्हें शिक्षा के साथ संस्कार भी दिए और अहिल्याबाई बेहद ही दयालू भाव कि महिला थी अब जानते हैं अहिल्या बाई की जीवनी में इनके वैवाहिक जीवन को

अहिल्या बाई की जीवनी

अहिल्याबाई का विवाह 

वैसे तो अहिल्याबाई बचपन से ही समझदार और चंचल लड़की थी और इनकी शादी बचपन मे ही एक खंडेराव होलकर के साथ हो गई थी क्योंकि एक बार राजा मल्हार राव जोकि खण्डेराव होलकर के पिता थे पुणे जा रहे थे वो विश्राम करने के लिए उसी गाँव मे ठहर गए और उसी वक्त अहिल्याबाई गरीबों की मदद कर रही थी यह देखकर राजा मल्हार खुश हो गए और अहिल्याबाई की शादी अपने बेटे खण्डेराव होलकर से कराने का प्रस्ताव पिता मान्कोजी के सामने रखा

 

और उनकी शादी 8 वर्ष कि आयु मे हुई और इतने कम उम्र मे मराठा कि रानी बन गई उनके पत्ति खण्डेराव क्रूर स्वभाव के थे फिर भी अहिल्याबाई इन्हे अच्छा योद्धा बनाने मे इनको प्रेरित करती इनको समझदार बनने के पिछे अहिल्याबाई का ही हाथ था।

और इनके शादी के 10 साल बाद इन्होंने मालेराव के रूप मे एक पुत्र को जन्म दिया और फिर तीनसाल के बाद एक पुत्री को जन्म दिया जिसका नाम मुक्ताबाई रखा। अहिल्याबाई हमेशा अपने पति के राज पाठ के कार्यों मे सहायता किया करती थी अब रुख करते हैं अहिल्या बाई की जीवनी में के परेशानी को

 

अहिल्याबाई की जीवन में परेशानिया 

इनका जीवन शुरुआती समय में सुखमय तरीके से गुजर रहा था किंतु 1754 में इनके पति का देहांत हो जाता है फिर ये संत बनने का विचार करती है जैसे ही इनके फैसले को इनके ससुर को पता चलता है तो वो अहिल्याबाई को अपना फैसला बदलने और राज्य की दुहाई देने लगते है और उन्हें संत बनने से रोक लेते हैं

लेकीन इतने में भी अहिल्याबाई का दुख, कम नही होता है क्योंकि 1766 मे इनके ससुर और 1967 में इनके बेटे की मृत्यु हो जाती है और अब अहिल्यालाई पूरी तरह अकेली हो जाती है और राज्य का कार्यभर कि पूरी जिम्मेवारी इनके सिर आ जाती है और अपने राज्य को विकसित कराने मेंलग जाती है

 

अहिल्याबाई कि भूमिका भारत मे 

अहिल्याबाई को आज लोग देवी कि तरह पुजा करते है क्योंकि जो काम इन्होंने अपने कार्यकाल मे किए थे कोई राजा ने ऐसा नही किया था इन्होंने अपने कार्यकाल मे अनेको तीर्थ रथल तथा वहीं तक पहुँचने का मार्ग भी बनाया इनके द्वारा कुएं और बावड़ी का निर्माण कराया गया था, इसी कारण कुछ लोग इन्हें अंधविश्वासी भी मानते है।

जब अहिल्याबाई अपने शासन काल में आई तो प्रजा पर हो रहे अत्याचारो को भी समाप्त किया क्योकि कुछ राजा गरीबो को अनाज के लिए तरसाया करते थे उन्हें भूखे प्यासे रखकर काम करवाया करते थे लेकिन तभी अहिल्याबाई ने गरीबों को अन्न प्रदान कराने के लिए एक योजना बनाई और उसमे वो सफल भी रही परंतु कुछ आतालाई राजाओं ने इसका खुब विरोध किया था। लेकिन, लोग अहिल्याबाई को माता का रूप मानने लगे और उनके ही जीवनकाल मे उन्हें देवी कि तरह पूजने लगे 

 

इनका कुछ खास प्रकार का लगाव इंदौर शहर से है क्योंकि उन्होंने इस शहर के विकास के लिए अपनी सारी पूंजी खर्च कर दी थी ये अपनी जीवन काल मे इस शहर को एक समृद्ध शहर बनाया था जिस कारण आज भी यहां भाद्रपद कृष्णपक्ष की चतुर्थी के दिन अहिल्योत्सव मनाया करते हैं

 

अहिल्याबाई को भारत सरकार द्वारा सम्मान

आज के समय मे अहिल्यालाई को उनके अच्छे कार्यों के लिए याद किया जाता हैं इसीलिए आज़ादी के बाद 25 अगस्त 1999 को भारत सरकार ने उन्हें सम्मानित किया। साथ ही उनके नाम पर डाक टिकट भी जारी किया और इन्ही के नाम पर कई अवॉर्ड भी जारी किए

 

अहिल्याबाई होलकर जयंती 

आज इनके जन्म दिन को एक जयंती के रूप मे मनाया जाता है जोकि साल के हरेक 31 मई के दिन होता है

 

अहिल्याबाई क्यों प्रसिद्ध

इनके प्रसिद्ध होने के कई कारण है साथ ही इन्होंने अपने जीवन मे ऐसे-ऐसे कार्य किए जोकि समाज को एक नई दिशा दिखाई और नदी कि सफाई और पुनर्जीवन के लिए भी अद्भूत प्रयास किए। ये अपनी शासन काल मे जनता को अन्न देने का भी योजना शुरू की थीं

 

अहिल्याबाई होलकर वंशज 

ये मराठा साम्राज्य के महान सम्राट शिवाजी महाराज की वंशज थी जोकि साम्राज्य कि पहली महिला सरदार भी

अहिल्या बाई की जीवनी से कुछ और प्रश्न

FAQ

1) अहिल्याबाई कौन समाज की थी? 

उत्तर : मराठा

2) अहिल्याबाई के बाद राजा कौन बना? 

उत्तर : महाराज तुकोजी राव

3) होलकर कौन सी जाति है 

उत्तर : चरवाहा

इन्हे भी पढ़े (खास आपके लिए)

बाबा रामदेव का जीवन परिचय

सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय

धीरेन्द्र शास्त्री का जीवन परिचय