किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया प्रश्न उत्तर class 9

तो दोस्तों अगर आप भी क्लास 9 के छात्र हैं और आप भी गूगल पर केवल किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया प्रश्न उत्तर को ढूंढ रहे तो आप बिलकुल ही सही पोस्ट पर आए हैं क्योंकि आज हमने इसी के बारे में बताया हैं तो चलिए शुरु करते हैं..

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किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में

किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया प्रश्न उत्तर class 9

अभ्यास

प्रश्न 1. यह ऐसी कौन सी बात रही होगी जिसने लेखक को दिल्ली जाने के लिए बाध्य कर दिया है

उत्तर : लेखक को घर के ही किसी सदस्य ने कोई ऐसी कड़वी बात कह दी होगी जिससे उसका हृदय आहत हो उठा। उसने स्वयं का अपने घर में रहना असुविधाजनक लगा होगा। उस कड़वी बात से उसके स्वाभिमान को भी ठेस पहुँची होगी।

शायद लेखक अपने घर में निठल्ला रहा हो, उसे कोई काम न मिला हो। और उसके मन में अपने जीवन में कुछ कर दिखाने की ललक जगी होगी। इसी कारण जेब में मात्र 7 रुपए होने पर भी दिल्ली के लिए निकल पड़ा।

प्रश्न 2.लेखक को अंग्रेजी में कविता लिखने का अफसोस क्यों रहा होगा।

उत्तर- लेखक हमेशा अंग्रेजी व उर्दू में ही कविता लिखता था उसे बाद में अनुभव हुआ कि उसे हिंदी भाषा पुरा ज्ञान प्राप्त करके हिंदी में कविता लिखनी चाहिए थी। परन्तु तब तक उसका हिंदी भाषा से सम्बंध लगभग टूट सा गया था।

वह हिंदी भाषा के साहित्य, शिल्प से अजनबी हो चला था। दूसरे, उसके घर का वातावरण भी ऐसा ही था, जहाँ उर्दू बोली जाती थी। यह अपने भावुक मन से उपजी भावनाओं को गजल के रूप में उकेरने लगा था। हिंदी से उसका रिश्ता टूट गया।

अब उसकी अभिव्यक्ति का माध्यम या तो अंग्रेजी भाषा बनी या फिर उर्दू इसी वजह से उसे अंग्रेजी में कविता लिखने पर अफसोस हो रहा था।

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प्रश्न 3. अपनी कल्पना से लिखिए कि बच्चन ने लेखक के लिए ‘नोट’ में क्या लिखा होगा।

उत्तर- एक दिन बच्चन जी लेखक से मिलने के लिए स्टूडियो पर आए तब तक लेखक स्टूडियो से जा चुका था। उसकी कक्षा समाप्त हो चुकी थी। इसी वजह से लेखक की बच्चन जी से भेंट नहीं हो पाईं।

बच्चन जी यहाँ उसके नाम एक नोट लिखकर छोड़ गए। लेखक बताता है यह एक अच्छा नोट था। इस नोट को पाकर लेखक कृतज्ञ हुआ। लेखक ने नोट में लिखी बात तो स्पष्ट नहीं लिखा परन्तु उस नोट की विषय-वस्तु की कल्पना की जा सकती है कि बच्चन जी ने लेखक से मिलने की इच्छा व्यक्त की होगी। साथ ही उन्होंने लेखक की रचना के विषय में भी जानकारी मांगी होगी।

प्रश्न 4 लेखक ने बच्चन के व्यक्तित्व के किन-किन रूपों को उभारा है?

उत्तर- लेखक ने अपनी इस रचना में बच्चन जी के व्यक्तित्व के कई रूपों का जिक्र किया है। जैसे कि बच्चन जी मित्रता का निर्वाह करना जानते थे। वे अपने मित्रों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते थे।

उन्होंने अपने इस लेखक मित्र की न केवल एम. ए. में प्रवेश लेने में मदद की बल्कि पूरी पढ़ाई का खर्चा भी स्वयं उठाया। उन्होंने इस जिम्मेवारी को सतर्कतापूर्वक निभाया भी। बच्चन जी एक सहृदय कवि थे। तत्कालीन समय में उनकी रचनाओं की खूब चर्चा थी। ये कवि सम्मेलनों में भी जाते थे।

बच्चन जी अपना काम करते हुए कभी न झिझकते थे। कुली के अभाव में वे स्वयं अपना सामान ढोकर ले गए। वे उभरते कवियों के प्रेरणास्रोत तथा मार्गदर्शक थे। लेखक के अनुसार बच्चन जी साधारण और सहजप्राय दुष्प्राय थे।

प्रश्न 5. बच्चन के अतिरिक्त लेखक की अन्य किन लोगों का तथा किस प्रकार का सहयोग मिला?

उत्तर- लेखक को अपने जीवन काल में बच्चन जी के अतिरिक्त अन्य कई सहृदय लोगों का सहयोग समय-समय पर मिलता रहा, जिसे लेखक कभी न भुला सकेगा।सबसे पहले उकील आर्ट स्कूल में शारदा चरण जी का सहयोग मिला।

उन्होंने लेखक से कभी फीस न तो उसे फ्री दाखिला दिया। पंत जी के सहयोग से लेखक को इंडियन प्रेस से अनुवाद कार्य मिला, जिससे उन्हें बहुत बड़ा आर्थिक सहयोग मिला।लेखक ने पंत तथा निराला जी से ही कविता लिखने की प्रेरणा पाई।

प्रश्न 6. लेखक के हिंदी लेखन में कदम रखने का क्रमानुसार वर्णन कीजिए।

उत्तर- लेखक ने बच्चन जी के संपर्क में आने के बाद हिंदी कविता लिखनी शुरू की। इससे पूर्व उसकी कुछ रचनाएँ 1953 में ‘सरस्वती’ तथा ‘चांद’ नामक पत्रिकाओं में छप चुकी थीं।

पंत और निराला जी का प्रोत्साहन पाकर लेखक हिंदी -लेखन में प्रविष्ट हुआ। बच्चन जी के बताए ‘प्रकार’ में लेखक ने काव्य रचना की। लेखक बच्चन जी के निशा- निमंत्रण से बहुत प्रभावित हुआ। उसी पर लेखक ने “निशा- निमंत्रण के कवि के प्रति” कविता लिखी। इस रचना पर पंत जी के कई संशोधन भी आए।

यह रचना प्रकाशित न हो सकी। ‘सरस्वती’ में छपी रचनाओं ने निराला जी का ध्यान लेखक की तरफ खींचा। उसके बाद वह ‘हंस’ कार्यालय की कहानी में चला गया।

प्रश्न 7. लेखक ने अपने जीवन में जिन कठिनाइयों को झेला हैं, उनके बारे में लिखिए।

उत्तर- लेखक एक साधारण-से घर-परिवार से था। मैट्रिक के बाद वह शायद घर पर निठल्ला ही था उसके पास धनाभाव भी था। यहाँ तक कि वह स्कूल की फीस चुकाने में भी असमर्थ था।

उसकी पत्नी का भी अल्पायु में ही देहांत हो गया था। वह टी. बी. की मरीज थी। इसके बाद लेखक बिल्कुल अकेला पड़ गया था। इन सभी समस्याओं से जूझते हुए उसकी शिक्षा भी व्यवस्थित रूप में न चल सकी। इस तरह हम देखते हैं कि लेखक ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों झेली और संघर्ष किया।

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