प्रेमानंद महाराज का जीवन परिचय – वृन्दावन वाले महाराज, आश्रम, वृंदावन, जन्म, उम्र, परिवार 2023

तो दोस्तो आज के इस पोस्ट पर हम प्रेमानंद महाराज का जीवन परिचय जानने वाले हैं जिसे जानकर आप भी गदगद हो जाओगे तो चलिए शुरु करते हैं

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प्रेमानंद महाराज का जीवन परिचय – वृन्दावन वाले महाराज, आश्रम, वृंदावन, जन्म, उम्र, परिवार 2023

प्रेमानंद महाराज का प्रारंभिक जीवन

प्रेमानंद महाराज का जीवन परिचय कि बात की जाए तो महाराज जी का जन्म एक निर्धन और विवेकपूर्ण परिवार मे हुआ था ये कानपुर के उत्तर प्रदेश मे जन्मे थे जिनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पाण्डेय था इनके पिता जी का नाम की शम्भू पाण्डे और माता जी का नाम श्रीमती रामा देवी था।

महाराज जी के दादा जी भी सन्यासी थे और इनके घर मे सन्यासी साधुओं का आर्शीवाद बना रहा था जिस कारण इनके घर का माहौल हमेशा निर्मल, शुद्ध और पवित्र रहा करता था प्रेमानंद जी महाराज को जीवन भक्ति से भरा रहता है, और चलिए अब जानते है प्रेमानंद महाराज का जीवन परिचय को विस्तारपूर्वक

 

प्रेमानंद महाराज जी का जन्म 

महाराज जी का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के सरसोल ब्लॉक के अखरी गांव मे हुआ था इनका बौद्धिक स्तर बचपन से ही तेज और बच्चों कि अपेक्षा अलग था क्योंकि इनका ज्यादातर ध्यान किर्तन करना, भक्ति में, मंदिर जाना जैसे धार्मिक कार्यों मे लगा रहता था

Premanand Maharaj का परिवार 

महाराज जी के परिवार कि बात करे तो इनके पिता जी का नाम श्री शम्भु पाण्डेय था जो कि एक परम भक्त थे और माता जी का नाम श्रीमती रामा देवी भी था इसके दादा जी भी एक महान सन्यासी थे जिनके कारण महाराज जी के परिवार का माहौल हमेशा ही पवित्र रहा करता था साथ ही इनके माता पिता हमेशा ही साधू संतो कि सेवा करते थे जिनसे इनके परिवार पर ऋषि-मुनियों का आर्शिवाद बना रहता था इनके बड़े भाई ने श्रीमद‌भागवत का ज्ञान अर्जित किया था जो अपने परिवार को सुनाया करते थे।

 

प्रेमानंद महाराज की शिक्षा

महाराज जी के घर परिवार का माहौल अध्यात्मिक से जुड़ा हुआ था जिस कारण ये कम उम्र मे ही चालीसा का पाठ पढना शुरु कर दिए। और जब प्रेमानंद महाराज 5वीं कक्षों में थे तो उन्होंने कभी गीता जी, पढ़ना शुरू कर दिए। शिक्षा ग्रहण करने के दौरान उनके मन मे कई प्रकार के प्रश्न उठते थे जिनका जवाब जानने के लिए श्री राम और श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी का जाप किया करते थे।

और 9वीं कक्षा तक पहुँचते पहुंचते उन्होंने ईश्वर कि खोज करने के लिए अध्यात्मीक जीवन जीने का कठोर निश्चय ले लिया और 13 वर्ष कि आयु में ही सब कुछ त्यागकर अध्यात्मिक जीवन कि ओर मुड़ गए। अब आगे जानते है, प्रेमानंद महाराज का जीवन परिचय में बह्राचारी जीवन को

 

महाराज जी का ब्रम्हचारी जीवन 

जब महाराज जी ने घर छोड़ा तो नैष्ठिक ब्रम्हचर्य में दीक्षित लिया और उनका नाम बदलकर आनंदपूर्वक ब्रहाचारी रखा गया तब उन्होंने सन्यासी जीवन अपना लिया और महावाक्य को अपनाने के बाद उनका नाम स्वामी आनंदश्र रखा गया

प्रेमानंद महाराज का जीवन परिचय

महाराज जी के कठिन तपस्या

ईश्वर प्राप्ति के लिए वे कठिन तप करते थे उनका सम्पूर्ण जीवन भगवान कि भक्ति मे समर्पित हो गया था और ज्यादातर समय अकेले मे ही व्यतीत करना पसन्द करते थे, वे केवल भोजन पाने के लिए भिक्षा मांगा करते थे और कई दिनो तक उपवास भी किया करते थे वे हमेशा भगवान कि भक्ति मे मग्न रहा करते थे जिस कारण वे सारे शारिरीक मोह-माया, चेतना से ऊपर उठ चुके थे

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तब उन्होंने आकासवृत्ति को स्वीकार किया यानि बिना किसी व्यक्गित प्रयास के केवल वही स्वीकार करना जो भगवान द्वारा दिया जाएगा और अन्य किसी भी चीज का उम्मीद नही करना। जब से महाराज जी ने सन्यासी जीवन अपना था उनका अधिकतर समय गंगा नदी के किनारे बितता था

और ज्यादातर समय गंगा नदी के किनारे व्यतीत करने से वे गंगा को अपनी दूसरी माँ मानते थे किसी खाना, पानी, कपड़ा कि परवाह किए बगैर गंगा और हरिद्वार नदि के घाटो पर भ्रमण किया करते वे अपनी दिनचर्या ,किसी भी मौसम मे नही बदलते थे वे हमेशा प्रतिदिन गंगा में 3 बार स्नान करते थे कई बार तो ठंडा मौसम होने के कारण शरीर कापने लगता था फिर भी भगवान की भक्ति में लीन रहा करते थे

इसलिए उन्हें किसी भी कष्ट का कोई अहसास नही होता था तब फिर उन्हें भगवान शिव का आर्शीवाद मिला और अब जानेगे प्रेमानंद महाराज जी का जीवन परिचय मे वृदावन आगमन

 

प्रेमानन्द का वृदावन मे आगमन

एक दिन वे बनारस मे एक पेड़ के नीचे ध्यान कर रहे थे तभी श्री श्यामाश्याम कि कृपा से वृद्धावन की ओर आकर्षित हुए और बाद मे एक रास लीला मे करीबने एक महीने तक भाग लिया और सुबह मे श्री चैतन्य प्रभु की लीला करते हैं, और रात्रि मे रास लीला देखते और एक महीने के अन्दर ही वे इतने लीला में मग्न हो गए कि उसके बीना जीवन जीने कि कल्पना भी नही कर पा रहे थे

उनका जीवन पूरा बदल गया स्वामीजी कुछ समय बाद श्री नारायण दास शिष्य की मदद से मथुरा जाने को तैयार हो गए किन्तु वे नही जानते थे कि वहाँ जाने पर सदा के लिए रह जाएंगे।

वहा पर महाराज जी किसी को नहीं जानते थे लेकिन महाराज जी वृद्धावन में रहने लगे और पुरा दिन राधावल्लव जी को देखते रहते थे एक बार वृद्धावन के पुजारी ने महाराज जी को एक श्लोक सुनाए परन्तु वे इसका अर्थ नही समझ पाए तो अर्थ समझाने के लिए गोस्वामी जी इन्हे श्री हरिवंश का जाप को कहे लेकिन इसके लिए महाराज पी हिचक रहे थे क्योंकि इससे पहले वे ऐसा नही किए थे

लेकिन अगले दिन जब वे वृन्दावन कि परिक्रमा कर रहे थे तो खुद ही वे श्री हरिवशं का जाप करते खुद को पाया और इनकी भक्ति मे लीन हो गए । और अब जानते है प्रेमानंद महाराज का जीवन परिचय में इनके स्वास्थ्य को

 

महाराज जी का स्वास्थ्य

इनके स्वास्थ्य कि बात कि जाए तो ये अभी लगभग 60 साल के है और कई साल पहले इनके दोनो किडनी खराब हो गए थे फिर भी इनका स्वास्थ्य अभी तक ठीक है ये कहते है कि इनका सारा जीवन राधा जी कि भक्ति और सेवा में रहेंगी। ये दिनभर भक्ति मे लीन रहते और यहाँ पर आज भी देश और विदेश से भक्तजन आते है और ये उनके सवालो का जवाब और भक्ति मार्ग पर चलने को बताते है।

 

प्रेमानंद जी महाराज का आश्रम 

महाराज जी का आश्रम उत्तर प्रदेश के वृंदावन में है।

प्रेमानंद जी महाराज का पता

श्री हित राधा केली कुन्ज, वृन्दावन परिकर्मा मार्ग, वराह घाट, वृन्दावन उत्तर प्रदेश, वृन्दावन-281121

अधिक जानकारी के लिए इनके ऑफिसीयल वेबसाइट पर जा सकते हैं

वेबसाईट – Vrindavangasmahima.com

 

प्रेमानंद महाराज का जीवन परिचय के कुछ और प्रश्न (FAQ)

1) प्रेमानंद महाराज क्यों प्रसिद्ध है 

उत्तर: अपने प्रवचन के कारण

2) हम प्रेमानंद जी महाराज से कैसे मिल सकते है 

उत्तर- मथुरा जाना होगा

3) प्रेमानंद महाराज की आयु कितनी है 

उत्तर: लगभग 60 साल

4) प्रेमानंद जी के आश्रम का तथा नाम है ?

उत्तरः राधा निकुंज आश्रम