बूढ़ी पृथ्वी का दुःख I Jharkhand Board Class 8 Hindi Notes

तो दोस्तो अगर आप भी क्लास 8th के छात्र हैं और गूगल पर बूढ़ी पृथ्वी का दुःख के प्रश्न उत्तर ढूंढ़ रहे हैं तो आप बिलकुल ही सही पोस्ट पर आ चुके हैं तो चलिए शुरु करते हुए

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बूढ़ी पृथ्वी का दुःख

बूढ़ी पृथ्वी का दुःख I Jharkhand Board Class 8 Hindi Notes

MCQ

(1) उपर्युक्त पंक्तियाँ में किस समस्या की ओर संकेत किया गया है ?

(a) वायु प्रदूषण की समस्या

(b) ध्वनि प्रदूषण की समस्या

(c) जल प्रदूषण की समस्या 

(d) पूजा की समस्या

उत्तर-(c)

 

(2) रात के सन्नाटे में नदियाँ क्यों रोती हैं?

(a) पानी की कमी

(b) प्रदूषित होने के कारण

(c) वर्षा नहीं होने के कारण

(d) जनसंख्या वृद्धि के कारण

उत्तर-(b)

(3) अर्घ्य का अर्थ होगा-

(a) अर्पण

(b) धन

(c) आधा

(d) धान

उत्तर- (a)

 

(4) उपर्युक्त अंश किस पाठ से लिया गया है?”

(a) गुरु-शिष्य

(b) बूढ़ी पृथ्वी का दुःख

(c) मित्रता

(d) पथ की पहचान 

उत्तर-(b)

(5) कौन खून की उल्टी कर रहा है?

(a) हवा

(b) पानी 

(c) धरती

(d) आकाश

उत्तर – (a)

(6) खून की उल्टी करने का मतलब है-

(a) प्रदूषण

(b) बीमारी 

(c) खुशी

(d) दुख 

उत्तर- (a)

(7) ‘बूढ़ी पृथ्वी का दुःख’ शीर्षक कविता में बूढ़ी पृथ्वी को किस बात का दुःख है?

(a) प्रकृति के दोहन का 

(b) प्रकृति के प्रदूषण का

(c) (a) और (b) दोनों का

(d) पत्थरों के टूटने का 

उत्तर-(c)

(8)”बूढ़ी पृथ्वी का दुःख” कविता में कवयित्री किससे प्रश्न पूछ रही है?

(a) पृथ्वी पर रहने वाले जानवरों से।

(b) पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति से। 

(c) पृथ्वी पर निवास करने वाले पक्षी से।

(d) पृथ्वी पर रहने वाले जलचर प्राणी से

उत्तर-(b)

(9) पहाड़ का सीना क्यों दहलता है?

(a) पहाड़ पर चढ़ने से 

(b) पहाड़ पर वृक्ष उगने से

(c) पहाड़ को तोड़ने के लिए विस्फोट से

(d) पहाड़ के खिसकने से

उत्तर-(c)

(10) “बूढ़ी पृथ्वी का दुःख” कविता के रचनाकार कौन है?

(a) डॉ. हरिवंशराय बच्चन 

(b) माखनलाल चतुर्वेदी 

(c) निर्मला पुतुल

(d) तुलसीदास

उत्तर-(c)

अब चलिए जानते हैं बूढ़ी पृथ्वी का दुःख के पाठ के प्रश्न उत्तर को

पाठ से :

1. इस कविता में कवयित्री किससे प्रश्न पूछ रही है ? 

उत्तर- इस कविता में कवयित्री पाठक (जनता) से प्रश्न पूछ रही है।

2. पहाड़ का सीना क्यों दहलता है ? 

उत्तर – पहाड़ों में डाइनामाइट लगाकर तोड़ा जा रहा है। क्रेशर मशीनों से उन्हें तोड़ा जा रहा है। इन सबसे पहाड़ का भी सीना दहल रहा है।

3. कवयित्री को किसके आदमी होने पर संदेह है ? 

उत्तर- कवयित्री को हम लोगों के आदमी होने पर संदेह है। हम कैसे अपने को चेतन, बुद्धिमान मनुष्य कहते हैं। अगर हम बुद्धिमान हैं तो पृथ्वी पर बढ़ते प्रदूषण के संकट को क्यों नहीं देख समझ पा रहे। इसको कम करने के उपाय क्यों नहीं ढूंढ रहे हैं।

4. बूड़ी पृथ्वी को किस बात का दुःख है ?

उत्तर- पृथ्वी पर बढ़ते प्रदूषण ने उसे असमय ही बूढ़ी बना दिया है। बूढ़ी जिस प्रकार विभिन्न प्रकार की व्याधियों और कष्टों से घिरी रहती है उसी तरह प्रदूषणों ने हमारी पृथ्वी को भी गंदा कर रखा है। पृथ्वी को इसी बात का दुःख है।

पाठ से आगे :

1. आपकी समझ में कवयित्री ने पृथ्वी के लिए बूढ़ी विशेषण का प्रयोग क्यों किया है ?

उत्तर- बुढ़ापा दुःखदायी होता है। पृथ्वी भी बूढ़ी हो गई है, क्योंकि पृथ्वी पर प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इस प्रदूषण के कई भयानक एवं गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। अतः पृथ्वी के लिए बूढ़ी विशेषण सर्वथा उपयुक्त है।

2. पृथ्वी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए आप कौन-कौन से उपाय करेंगे ?

उत्तर- पृथ्वी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए हम निम्नांकित उपाय कर सकते हैं-

(i) वृक्षारोपण कर

(ii) प्रदूषण पर नियंत्रण कर

(iii) नदी जल को साफ कर

(iv) धरती पर कूड़ा करकट एकत्र कर ।

3. किसी पेड़ को कटकर धरती पर गिरते देखकर आपके मन में क्या विचार उठते हैं ? लिखें। 

उत्तर- जब पेड़ कटकर धरती पर गिरता है तो लगता है किसी मनुष्य की हत्या कर दी गई है।

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