माटी वाली के प्रश्न उत्तर class 9

तो दोस्तों अगर आप भी class 9 के विधार्थी हैं और आप भी गूगल पर माटी वाली के प्रश्न उत्तर class 9 के प्रश्न उत्तर ढूंढ रहे हैं तो आप बिलकुल सही पॉइंट्स  पर आए हैं क्योंकि आज हम इसी का जवाब जानेंगे तो चलिए शुरु करते हैं….

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माटी वाली के प्रश्न उत्तर class 9

अभ्यास के प्रश्न

माटी वाली

प्रश्न 1. ‘शहरवासी सिर्फ़ माटी वाली को नहीं उसके कंटर को भी अच्छी तरह पहचानते है आपकी समझ से वे कौन से कारण रहे होंगे जिनके रहते ‘माटी वाली ‘ को सब पहचानते थे ?

उत्तर- शहरवासी न केवल माटीवाली को जानते थे बल्कि उन्हें उसके कंटर की भी पहचान थी। इसका कारण यह था कि प्रायः हर घर-परिवार को मिट्टी की आवश्यकता पड़ती थी।

हर घर में मिट्टी की प्राप्ति करने एकमात्र वही वृद्धा थी वहाँ उसका अन्य प्रतिद्वन्दी कोई नहीं था इसलिए उसके सिर पर रखे कँटर को लोग दूर से ही पहचान लेते थे।

प्रश्न 2. माटी वाली के पास अपने अच्छे या बुरे भाग्य के बारे में ज्यादा सोचने का समय क्यों नहीं था ?

उत्तर : एक बार जब वृद्धा ने एक घर में मिट्टी पहुंचाई तो उस घर की मालकिन ने उसे भाग्यवान कहके पुकारा। तब माटीवाली सोचने लगी कि वह भाग्यवान क्यों कहा है। उसे तो कभी इस विषय में सोचने-विचारने का समय ही नहीं मिलता था। वह सारा दिन हर समय अपने काम में ही जुटी रहती थी। रात को ही वह वापस घर लौट पाती थी।

और इसलिए उसके भाग्य में तो बस काम करना ही लिखा था और कभी काम न मिलने या करने की हालत में उसे भूखों मरने की नौबत आ सकती थी।

प्रश्न 3. “भूख मीठी कि भोजन मीठा ” से क्या अभिप्राय है?

उत्तर- एक स्त्री साग न होने के कारण माटीवाली को रोटी के साथ चाय देती है तब माटीवाली चाय को ही साग की तरह बताती है मालकिन तब उससे कहती है कि भूख तो अपने-आप में साग होती है।

अधिक भूख लगने पर भोजन की मिठास नहीं देखी जाती है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले भूख मिटाने का उपाय किया जाता है। भूख मिटाना ज्यादा जरूरी है न कि भोजन का स्वाद

प्रश्न 4. ‘पुरखों की गाढ़ी कमाई से हासिल की गई चीज को हराम के भाव बेचने को मेरा दिल गवाही नहीं देता-मालकिन के इस कथन के आलोक में विरासत के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

उत्तर- एक घर की मालकिन के ये उद्गार उसके विरासत के प्रति लगाव के भाव की झलकातो हैं।गृहस्वामिनी ने आर्थिक तंगी में भी अपनी पुरखों की वस्तुओं को बेचने के कगार पर नहीं आने दिया।

इस तरह उसने अपने पुरखों के प्रति सम्मान भाव प्रकट किया। इसीलिए उसने अब तक अपने घर में पीतल के बरतनों को संभालकर रखा है। उसने ये वर्तन कभी व्यापारियों को नहीं बेचे हैं।

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प्रश्न 5. माटी वाली का रोटियों का इस तरह हिसाब लगाना उसकी किस मजबूरी को प्रकट करता है?

उत्तर-मिट्टी डालने के और एवज में मिली रोटियों का हिसाब-किताब लगाना माटी वाली की ब गरीबी व दरिद्रता को दर्शाता है। उसके सम्मुख सदैव स्वयं का और अपने पति का पेट भरने का सवाल उपस्थित रहता है।

इसलिए उसे जहाँ से भी रोटियाँ मिलती हैं, उनमें से कुछ रोटियाँ अपने बूढ़े पति के लिए बचाकर रखना आवश्यक हो जाता है। इन्हीं रोटियों से उन दोनों का पेट भरता है। कभी आधे पेट भी रहना पड़ता था।

प्रश्न 6. आज माटी वाली बूढ़े को कोरी रोटियाँ नहीं देगी इस कथन के आधार पर माटी बाली के हृदय भावों को अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर- ‘आज माटी वाली बूढ़े को कोरी रोटियाँ नहीं देगी इस कथन से माटी वाली का अपने बुझे पति के प्रति प्रेम भाव प्रकट होता है। माटी वाली को कभी-कभी साग न मिल पाने के कारण विवश होकर बूढ़े को सूखी रोटियाँ खिलानी पड़ती हैं।

एक दिन वह बूढ़े के लिए रोटी के साथ प्याज पीस-तलकर देने का विचार बनाती है। पति-प्रेम के कारण ही ऐसा सोचती है कि स्वयं अपने हाथों उसे भोजन परोस कर दे, ताकि वह भरपेट भोजन कर सके।

प्रश्न 7. ‘ गरीब आदमी का शमशान नहीं उजड़ना चाहिए। इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- टिहरी बाँध की सुरंगें बंद होने के कारण शहर में पानी भर गया पानी इतना अधिक था कि घर तो डूबे ही,श्मशान घाट भी डूब गए। श्मशान घाट को डूबा देखकर माटी वाली के मुख से निकलता है कि “गरीब आदमी का श्मशान नहीं उजड़ना चाहिए।”

इस कथन में माटी वाली की व्यथा प्रकट होती है कि उनका तो झोंपड़ा ही श्मशान की तरह होता है,जहाँ वे रोज मर-मर कर जीते हैं। यदि ये भी बाढ़ के पानी में डूब जाएं तो फिर भला उनके लिए कौन सी जगह बचेगी।

प्रश्न 8. ‘विस्थापन की समस्या पर एक अनुछेद लिखिए।

उत्तर- आज विभिन्न प्रदेशों में नदियों पर बाँध बनाए जा रहे हैं। इन बाँधों को बनाने के लिए नदियों के तट पर बसे अनेक गाँवों को उजाड़ा जाता है। इस कारण हजारों परिवारों को अपनी जमीन गंवानी पड़ती है। ये वहाँ से उजड़कर अपना घर बार गंवा बैठते हैं। ऐसी स्थिति में सम्बन्धित राज्य सरकार के सम्मुख उनके विस्थापन को लेकर एक गहन समस्या पैदा होती है।

सरकार उनकी रोजी-रोटी तो छीन लेती है परन्तु उनको अन्य जगह पर विस्थापित नहीं कर पाती है। अधिग्रहित जमीन के एवज में थोड़ा-बहुत मुआवजा देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेती है। उजड़े घर-परिवारों की समस्याओं-संकटों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता हैं।

FAQ :

(1)माटी वाली कौन सी जाति की थी?

उत्तर : अनुसूचित जाति

(2)माटी वाली क्या है ?

उत्तर : इसमे एक औरत पुराने कपडे कि गोल गद्दी बनाकर घर-घर जाकर मिट्टी का कनस्तर बेचती थी

(3) माटी वाली की प्रसिद्धि का क्या कारण था ?

उत्तर: क्योंकि वहाँ उसका कोई प्रतिहन्दी नही था और सभी घरो को लाल मिट्टी की आवश्यकता थी जिसे केवल वही दे सकती थी

(4) माटी वाली कौन से शहर की रहने वाली थी?

उत्तर: टिहरी

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