माता सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय 2023।। Savitribai Phule Biography in hindi

तो दोस्तो आज हम इस पोस्ट पर माता सावित्रीबाई फूले का जीवन परिचय जानने वाले हैं जिसे जानने के बाद आप भी इनकी मुरीद हो जाओगे क्योंकि

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इन्होंने अपने जीवन में पुरे समाज को बदलने के लिए ऐसे ऐसे कार्य किए दे की उनके लिए शब्द नहीं है तो चलिए जानते है ऐसे महान हस्ती के बारे में

माता सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय 2023।। Savitribai Phule Biography in hindi

सावित्रीबाई फुले का प्रारंभिक जीवन (Early life oo Savitribai Phule)

माता सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को नायगांव हुआ था और ये एक कृषक परिवार से संबंध रखती है जिनके पिता जी का नाम खंडोजी नेवसे पाटील और माताजी का नाम लक्ष्मी देवी था सावित्रीबाई फुले अपने परिवार में सबसे बड़ी बेटी थी और उस समय बाल विवाह का खूब प्रचलन था जिसके चलते इनका भी शादी 9 वर्ष की आयु में 1840 में 12 वर्षीय ज्योतिराव फुले के साथ कर दिया गया जोकि एक सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक और एक अच्छे विचारक भी थे माता सावित्रीबाई फुले जी का पढ़ाई उनके शादी के बाद शुरू हुआ क्योंकि उनके पति ज्योतिराव फुले उन्हें पढ़ाई लिए प्रोत्साहित कर रहे थे तब जाकर वे अपनी तीसरी और चौथी की पढाई, किसी सामान्य विद्यालय से प्राप्त कि और फिर बाद मे अहमदानगर से मिस फरार इंस्टीटयूशन में अपना प्रशिक्षण पुरा किया।

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सावित्री बाई फूले का शिक्षा मे योगदान

पुणे में बालिकाओं के लिए सबसे पहला स्कूल 1848 में ज्योतिराव और  माता सावित्रीबाई फुले के द्वारा शुरू किया गया था लेकिन ये रास्ता को अपनाने के लिए इनके परिवार और समाज ने काफी ज्यादा नकारा था लेकिन इन्हे उस्मान शेख और फातिमा शेख का भरपूर साथ मिला जिसमे इन दोनो भाइयों, बाहनों स्कूल को शुरु करने के लिए जमीन तक दे दिया था इस स्कूल कि पहली अधियीपका माता सावित्रीबाई फुले थी उन्होंने वैसे लोगो के लिए स्कूल खोले जो समाज के नजर मे अछूते माने जाते थे

साल 1952 में ये तीन स्कूल चला रहे थे और उसी साल 16 नंबबर को ब्रिटीश सरकार ने फूले समाज को शिक्षा में योगदान के लिए समानित किए थे और सावित्रीबाई फुले को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का दर्जा दिया गया।

माता सावित्रीबाई फुले

माता सातित्रीबाई फूले का जीवन संघर्ष

इनके द्वारा चल रहे तीनो स्कुल 1858 तक बन्द कर दिए गए ,जिसके कई कारण सामने आए जिसमे 1857 कि क्रांति के बाद स्कूल प्रबंधन समिति से ज्योतिराव ने इस्तीफा और समाज द्वारा पीडित समुदायों के लोगों को शिक्षित करने के आरोप मे उन्हें हटा दिया गया, लेकिन एक वर्ष के बाद 18 स्कूल खोले और विभिन्न जातियो के लोगो को पढ़ाया जिसमे माता सावित्रीबाई फूले और फातिमा ने महिलाओं और कमजोर जातियों के लोगो को पढ़ाना शुरू किया जिसमे उच्चे जाति लोगो को यह अच्छा नहीं लगा और ये लोग सावित्रीबाई फुले और फातिमा को धमकी भी दी और परेशान तथा अपमानित भी करते थे यहाँ तक कि जब ये स्कूल जाते तो लोग इन पर गाय का गोबर, पत्थर तथा मिट्टी फेकते थे लेकिन ये इझसे तनिक भी परेशान नही हुई है आगे बढ़ती रही

 

सावित्रीबाई फुले द्वारा किए गए सामाजिक सुधार

इन्होंने समाज मे न केवल शिक्षा में अपनी भूमिका अदा की बल्कि और भी अन्य क्षेत्रो मे अपना पूर्ण समर्थन किया ताकि उन्हें भी समाज से दूर किया जा सके जिनकी सूची नीचे है।

  • हुआछूत मिटाना
  • विधवा पुनर्विवाह शुरू करना
  • महिलाओं के शिक्षा पर जोर
  • सती प्रथा को समाप्त करना

सावित्री बाई फुले की मृत्यु

ज्योतिराव और माता सावित्रीबाई फुले ने एक ब्राह्मण परिवार से एक बच्चा गोद लिया था जिसका नाम यशवंतराल था जो बड़ा होकर एक डॉक्टर बने और लोगों की सेवा करना शुरू कर दिए।

जब 1897 मे प्लेग महामारी ने महाराष्ट्र और नालासोपारा के नजदीकी इलाके में फैल गया तो यशवंतराल ने एक क्लिनिक खोला जिसमें संक्रमित लोगों का इलाज किया जाता था और इस क्लिनिक में सावित्रीबाई फुले संक्रमित लोगों को ले जाया करती थी और रोगियो कि सेवा करते हुए वे भी इसके चपेट मे आ गई और 10 मार्च 1897 को इनका निधन हो गया।

 

सावित्रीबाई फूले कि आश्चर्यजनिक बातें

  • ये मराठी कवियित्री थी ।
  • इन्होने विधवाओं के मुंडन पर रोक लगाया
  • रेप से पीडित बालिकाओं के लिए बालहत्या प्रतिबंधक गृह नाम का केन्द्र खोला
  • सगुनाबाई के साथ ये कई स्कूलों मे काम किए।

 

FAQ:

(1) सावित्रीबाई फुले की मृत्यु कैसे हुई ?

उत्तर: प्लेग से

(2) सावित्रीबाई के कितने बच्चे थे ?

उत्तर : एक भी नही लेकिन एक बच्चे गोद लिए थे जिसका नाम यशवंतराव था

(3) सावित्री बाई फुले के पिता का नाम तथा है ?

उत्तर: खन्दोजी नेवसे पाटिल

(4) भारत मे प्रथम महिला शिक्षक कौन है

उत्तर : सावित्रीबाई फुले