मित्रता पाठ के प्रश्न उत्तर class 8th ll मित्रता पाठ Ncert

तो दोस्तो आज के इस पोस्ट पर आए class 8th के मित्रता पाठ के प्रश्न उत्तर जानने वाले हैं तो पोस्ट पर अंत तक बने रहे और चलिए शुरु करते हैंमित्रता पाठ के प्रश्न उत्तर

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मित्रता पाठ के प्रश्न उत्तर class 8th ll मित्रता पाठ Ncert

पाठ से :

1.) आप किस प्रकार से कह सकते हैं कि मित्रों के चुनाव की उपयुक्तता पर हमारे जीवन की सफलता निर्भर करती है ?

उत्तर- मित्रों के चुनाव की उपयुक्तता पर हमारे जीवन की सफलता निर्भर करती है। संगति का गुप्त प्रभाव हमारे आचरण पर बड़ा भारी पड़ता है। मित्र हमें सद्मार्गी बनाता है। वहीं कुमित्र हमें कुमार्ग गामी बना देता है। संगति के कारण ही हमारे संस्कार सही एवं कुसंगति से हमारे लक्षण कुलक्षण में परिवर्तित हो जाते हैं। अतः जीवन में सच्चे मित्र हों तभी हमारा जीवन सफल हो पाता है।

 

2.) ‘विश्वासपात्र मित्र जीवन की एक औषध है ।’ आशय स्पष्ट करें। 

उत्तर- जिस प्रकार हम किसी चीज की खरीददारी काफी सोच-विचार कर करते हैं, उसी तरह मित्रता भी काफी सोच-विचार कर करनी चाहिए। मैत्री का उद्देश्य, उसका मूल्य आदि बातों को ध्यान में रखकर मित्रता करनी चाहिए। रंग, रूप एवं व्यवहार से मित्र नहीं बनाना चाहिए। विश्वासपात्र मित्र सदा हमें सहयोग करता है, अच्छा विचार देता है, अच्छे मार्ग पर चलने की सलाह देता है। अतः विश्वास पात्र मित्र जीवन की औषधि है। इस औषधि के सेवन से लाभ ही लाभ हैं।

3.) मित्र का चुनाव करते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ? 

उत्तर – मित्र का चुनाव करते समय हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-

 

मित्र उत्तम संस्कार युक्त हो एवं हमें भी ऐसे संस्कार

i)मित्र दोष एवं त्रुटियों से बचाए ।

ii)कुमार्ग पर जाने से रोकने वाला हो।

iii)उत्तमतापूर्वक जीवन निर्वाह करने में सहायक हो ।

iv)मित्र में उत्तम वैद्य की निपुणता और परख हो, माँ से दृढ़ करे। के धैर्य सी

v)कोमलता उपर्युक्त गुणयुक्त को ही अपना मित्र बनाना चाहिए।

 

4. “सच्ची मित्रता में उत्तम वैद्य की-सी निपुणता और परख होती है, अच्छी से अच्छी माता का-सा धैर्य और कोमलता होती है।” इस पंक्ति के आधार पर अच्छे मित्र की विशेषताओं का वर्णन करें। 

उत्तर- उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर अच्छे मित्र की निम्नांकित विशेषताएँ हैं-

 

(i) उत्तम संकल्पों से दृढ़ हो ।

(ii) दोष और त्रुटियों से दूर हो

(iii) सत्य, मर्यादा, पवित्रता एवं प्रेम जैसे मानवीय गुणों से युक्त हो।

(iv) उत्तमतापूर्वक जीवन निर्वाह में सहयोगी हो ।

(v) उसके दृष्टिकोण में धैर्य एवं परख हो ।

(vi) कुमार्ग पर पैर रखने के पूर्व ही सचेत कर देने वाला हो।

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5.) हमारा विवेक कुंठित न हो, इसके लिए हमें क्या-क्या प्रयास करना चाहिए ?

उत्तर- हमारा विवेक कुंठित न हो इसके लिए हमें पूरी तरह चौकस रहना चाहिए। ऐसे लोगों को मित्र बनाना चाहिए जिनका विचार सात्विक हो। उनका चरित्रबल बलिष्ठ हो। वैसी भावनाओं, बातों, या चीजों से दूर रहना चाहिए जो हमारे चित्त पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। अपने चरित्र को धारदार रखना चाहिए। सदा बुरी संगति, बुरी सोच एवं बुरे कार्यों से दूर रहना चाहिए।

 

6.) लेखक ने युवा पुरुष के लिए कुसंगति और अच्छी संगति को किस-किस के समान माना है ? उसने ऐसा क्यों माना है ?

उत्तर- लेखक ने युवा पुरुष के लिए कुसंग का ज्वर सबसे भयानक माना है। कुसंगति से बुद्धि का क्षय हो जाता है। कुसंगति सदैव अवनति के गड्ढे में ले जाती है। वहीं लेखक ने अच्छी संगति को पथ-प्रदर्शक माना है। अच्छी संगति पर हम पूरा विश्वास करें। ऐसे मित्र भाई समान होत है। अच्छी संगति से आत्मबल बढ़ता है। अच्छी संगति से हृदय शुद्ध, मृदुल एवं पुरुषार्थी बनता है। इससे शिष्टता, सत्यनिष्ठा आती है। हमारा चरित्र महान बनता है।

पाठ से आगे :

 

1.) आप किस तरह के लोगों से मित्रता करना चाहेंगे ? कारण सहित लिखें।

उत्तर- हम उत्तम संकल्पों से युक्त एवं दृढ़ लोगों से मित्रता करना चाहेंगे। जो हमें दोषों और त्रुटियों से बचाएँगे। हमारे सत्य, पवित्रता और मर्यादा के प्रेम को पुष्ट करेंगे। जब हम कुमार्ग पर पैर रखेंगे तब वे हमें सचेत करेंगे। जब हम हतोत्साहित होंगे, तब हमें उत्साहित करेंगे। तात्पर्य यह है कि हम उस तरह के लोगों से मित्रता करना चाहेंगे जो हमें उत्तमता पूर्वक जीवन निर्वाह करने में हर तरह से सहायता देंगे।

 

2.) लेखक ने विश्वासपात्र मित्र के संबंध में कहा है कि “वे उत्तम संकल्पों से हमें दृढ़ करेंगे, दोषों और त्रुटियों से हमें बचाएँगे, हमारे सत्य, पवित्रता और मर्यादा के प्रेम को पुष्ट करेंगे, जब हम कुमार्ग पर पैर रखेंगे तब वे हमें सचेत करेंगे, जब हम हतोत्साहित होंगे, तब हमें उत्साहित करेंगे।” क्या आपने कभी अपने मित्र को प्रोत्साहित किया है अथवा कभी गलत काम करने से उसे रोका है? दोनों स्थितियों में मित्र की प्रतिक्रिया कैसी रही है ?

उत्तर- मेरे मित्र रवि का पढ़ने में मन नहीं लगता था। वह घर से रोज स्कूल तो आता था पर क्लास से भाग कर घूमता रहता था। मुझे जब उसकी इस आदत का पता चला तो मैंने उसे समझाना शुरू किया। पहले तो उसपर असर नहीं पड़ा, अनसुना करता रहा। जब छः माही का रिजल्ट आया तो उसके अंक काफी कम थे। उसके गार्जियन बुलाए गए। पता चला कि वह विद्यालय ही नहीं आता है। वह काफी लज्जित हुआ। इसके बाद वह मेरी बातों पर गम्भीर होने लगा। आज वह हमारे विद्यालय का होनहार छात्र बन गया है। ,और अब चलिए जानते हैं मित्रता पाठ के प्रश्न उत्तर में और सवाल जवाब

 

क्या करेंगे आप :

1.) यदि आपका मित्र गलत रास्ते पर जा रहा हो ?

उत्तर – यदि मेरा मित्र गलत रास्ते पर जा रहा है तो मैं उसे समझाऊँगा । सदा उसे प्रोत्साहित करूंगा कि अच्छे रास्ते पर चलें। इसके लिए मैं अपने छात्र मंडली, उसके गार्जियन, शिक्षकों सभी को विश्वास में लेकर उसके आचरण को सुधारने का प्रयास करूंगा। उसकी सोच को सदैव मार्जित करूंगा।

2.) यदि आपका मित्र बात-बात में अपशब्दों का प्रयोग करता हो ?

उत्तर- प्रथम तो मै उसे प्यार से समझाऊँगा कि अपशब्द न बोलें। यदि वह नहीं मानता है तो पूरे छात्रों को उसकी आदत के बारे में जानकारी दूंगा। छात्र इसे रोकने का प्रयास करेंगे। इसके बाद भी न माना तो उसके गार्जियन से उसकी शिकायत करूंगा। इसपर भी वह नहीं मानता है तो शिक्षक महोदय से बात कर इसका सटीक इलाज कराऊँगा। उम्मीद है उसकी आदत सुधर जाएगी।.

 

3.) यदि आपका मित्र आपको गलत रास्ते पर जाने से रोके ? 

उत्तर- अगर मेरा मित्र मुझे गलत रास्ते पर जाने से रोके तो मैं उसकी बात मान लूँगा। गलत रास्ते का परित्याग कर दूंगा। साथ ही उससे गाढ़ी मित्रता कर लूँगा। ऐसे मित्र आज की दुनियाँ में मिलते कहाँ हैं ?

4.) यदि आपका मित्र आपको स्कूल छोड़कर फुटबॉल का मैच देखने के लिए साथ चलने को कहे ? 

उत्तर- अगर मेरा मित्र ऐसा कहता है तो मैं उसे स्कूल जाने के लिए बाध्य करूंगा। अगर वह नहीं मानता है तो मैं उसे छोड़कर स्कूल चला जाऊँगा। क्योंकि मैं घर से पढ़ने के लिए निकला हूँ मैच देखने के लिए नहीं ।

मित्रता पाठ के प्रश्न उत्तर में कुछ और प्रश्न FAQ :

1) मित्रता पाठ का उद्देश्य क्या है 

उत्तर: हम अपने मित्र के प्रति सकारात्मक सहानुभूति रखे

2) मित्रता पाठ से आप क्या समझते है 

उत्तर : कि मित्र के प्रति हमे हमेशा साकारात्मक विचार रखना चाहिए।