मेरे संग की औरतें पाठ के प्रश्न उत्तर class 9

तो दोस्तों अगर आप भी क्लास 9 मे हैं और आप भी गूगल पर मेरे संग की औरतें पाठ के प्रश्न उत्तर ढूंढ रहे हैं तो आप बिल्कुल ही सही post पर आए हैं क्योंकि आज हमने इसी के बारे में बताया हैं तो चलिए शुरु करते हैं…

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

मेरे संग कि औरतें

मेरे संग की औरतें पाठ के प्रश्न उत्तर class 9

अभ्यास के प्रश्न

प्रश्न 1. लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थी?

उत्तर- मृदुला गर्ग जी की नानी उनकी माँ की शादी से पहले ही दिवंगत हो चुकी थीं। अतः लेखिका के उन्हें देखने का प्रश्न ही नहीं उठता था। लेखिका ने अपने ही परिवार के सदस्यों, माँ के मुख से नानी के विषय में अनेक बातें सुनी-जानी । नानी के विषय में भिन्न-भिन्न बातें, विचार सुनकर लेखिका को अपनी नानी के व्यक्तित्व का ज्ञान हुआ, जिससे वे बहुत प्रभावित थीं। नानी भले ही एक अनपढ़ स्त्री रही हों परन्तु उनका अपना एक अलग व्यक्तित्व था। उनकी नानी अंग्रेज या अंग्रेजियत परस्ती कभी नहीं थीं। वे स्वाभिमानी स्त्री थीं और देशभक्तों के प्रति उनके दिल में आदर सम्मान था। उन पर भी अपने देश की आजादी का जुनून सवार रहता था।

इसी वजह से ये अपने निजी जीवन में भी अपने स्वतंत्र विचार रखती थीं। अपने ससुर व पति के विचारों से भिन्न विचारों के कारण वे अपने जीवन के अंतिम दिनों में अपनी पुत्री के विवाह को लेकर चिंतित थीं। उनके पति कैम्ब्रिज से डिग्री लेकर आए थे, इसलिए विलायती तौर-तरीकों को पसंद करते थे परन्तु लेखिका की नानी को अपने पति के निजी जीवन से कोई लेना-देना न था। नानी कभी अपने पति के तौर-तरीकों से प्रभावित नहीं हुई थीं। इसके विपरीत ये अपनी परंपराओं का निर्वाह करने वाली तथा पर्दा करने वाली स्वतंत्र विचारों वाली स्त्री थीं। यही सब बातें जान-सुनकर लेखिका अपनी नानी के व्यक्तित्व से प्रभावित थीं।

प्रश्न 2. लेखिका की नानी की आजादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही?

उत्तर- लेखिका के अनुसार उनकी नानी प्रत्यक्ष रूप में देश के लिए किसी आंदोलन में भले ही सक्रिय न रही हो परन्तु वे अपने दिल से अपने देशवासियों, देशभक्तों के साथ उनमें शामिल थीं। उन्होंने अपने पति के मित्र स्वतंत्रता सेनानी को अपना विश्वास पात्र बनाया। उन्होंने उनसे ही अपनी पुत्री के लिए एक ऐसा वर ढूँढने को कहा जो आजादी का सिपाही हो। इस तरह, हम कह सकते हैं कि लेखिका की नानी आजादी के आंदोलन में अप्रत्यक्ष रूप में शामिल थीं। उनके हृदय में देश की आजादी का जुनून था। इस तरह लेखिका की नानी की आजादी के आंदोलन में भागीदारी रही।

प्रश्न 3. लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में-

(क) लेखिका की माँ की विशेषताएँ लिखिए।

(ख) लेखिका की दादी के घर के माहीत का शब्द-चित्र अंकित कीजिए।

उत्तर- (क) लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में लेखिका की माँ की अनेक विशेषताएँ उजागर होती हैं। जैसे-लेखिका की माँ सुन्दर व्यक्तित्व की स्वामिनी थीं।

वे एक नाजुक मिजाज औरत थीं। उनकी ईमानदारी, निष्पक्षता एवं सच्चाई सभी को प्रभावित करती थी। घर के सभी सदस्य उनकी सलाह का सम्मान करते थे। वे कभी भी किसी की गोपनीय बातों को दूसरों के सम्मुख प्रकट न करती थीं।

(ख) उत्तर- लेखिका की दादी के घर का माहौल स्वच्छंद था। घर-परिवार के प्रत्येक सदस्य को अपनी भली-बुरी बातों को प्रकट करने की स्वतंत्रता थी। लेखिका की दादी भी कभी अपनी बहू पर कोई ताना उलाहना न देती थीं। लेखिका की परदादी भी उन्हीं के साथ रहती थीं। उनकी दादी ने अपनी पतोहू के लिए पहली संतान के रूप में लड़की होने की मन्नत मांगी थी।

भले ही अन्य लोगों को इस बात पर आश्चर्य हुआ परन्तु उनके अपने भिन्न विचार थे, जिन पर कभी किसी ने कोई आपत्ति न उठाई। इस तरह हम देखते हैं कि लेखिका के घर में काफी आजादी भरा वातावरण था।

प्रश्न 4. आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों मांगी?

उत्तर- लेखिका की परदादी ने अपनी पतोहू के लिए पहली संतान के रूप में लड़की होने की मन्नत मांगी थी। उन्होंने  यह मन्नत संभवतः इसलिए मांगी होगी कि उन्हें कभी भी लकीर का फकीर बनकर रहना रास नहीं आया था। वे सदैव लीक: से हटकर जीने वाली तथा स्वतंत्र विचार धारा वाली स्त्री थीं। सामान्यतः पहली संतान के रूप में लड़का मांगा जाता है। परंतु, दादी ने लीक से हटकर जीते हुए ही भगवान से ऐसी मांग की होगी। उनके मन में लड़कियों के प्रति सदैव स्नेह भाव बना रहा जिससे सिद्ध होता है कि ये लड़का-लड़की में कोई भेद न करती थीं।

 प्रश्न 5. डराने-धमकाने उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता पाठ के आधार पर तर्क सहित उत्तर दीजिए।

 उत्तर- लेखिका के घर का वातावरण ऐसा था जहाँ किसी को भी डराने-धमकाने उपदेश देकर या दबाव डालकर अपनी बात मनवाने का अधिकार न था किसी को भी सही राह पर लाने के लिए बड़ा ही सहज स्वभाव अपनाया जाता था। एक बार शादी के माहौल का फायदा उठाकर एक चोर उनके घर में घुस आया। भूलवश चोर लेखिका की दादी के कमरे में घुस गया। तब दादी ने उस चोर को न तो डराया धमकाया और न ही उसे कोई उपदेश दिया।

दादी ने चोर पर किसी भी प्रकार का दबाव न बनाते हुए उससे सहज स्वभाववश व्यवहार किया। रात्रिकाल में ही उससे कुएं का जल मंगवाया। तत्पश्चात् स्वयं लोटे से पानी पीकर शेष पानी उसे भी पीने को दे दिया।

इतना ही नहीं उस चोर को दादी ने ‘बेटा’ कहकर संबोधित किया। चोर दादी के इस सहज स्वभाव से प्रभावित होकर चोरी का काम छोड़कर खेती के काम में जुट गया। वह आपराधिक जीवन त्यागकर सही राह पर आ गया। 

प्रश्न 6. ‘शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है- इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का लेख कीजिए।

उत्तर- लेखिका मानती थी कि शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है। लेखिका कर्नाटक राज्य के एक छोटे से कस्बे बागलकोट में नियुक्त थी। वहाँ उसे बच्चों के लिए कोई ढंग का स्कूल न मिला। इस स्थिति में उसने कैथोलिक विशेष से उस कस्बे में एक स्कूल खोलने की प्रार्थना की।

उस क्षेत्र में क्रिश्चियन बच्चों की संख्या कम होने के कारण उसकी प्रार्थना स्वीकार नहीं की लेखिका सभी वर्ग के बच्चों की शिक्षा की पक्षपाती थी। फलतः उसने स्वयं अपने प्रयासों से एक ऐसा  स्कूल खोला, जिसमें बच्चों को अंग्रेजी, हिंदी के साथ-साथ कन्नड़ भाषा भी पढ़ाई जाती थी। लेखिका के प्रयासों से कर्नाटक राज्य सरकार ने उस स्कूल को मान्यता भी प्रदान कर दी। 

People also read

मैं क्यों लिखता हूं

एही ठैया झूलनी हैरानी हो रामा 

प्रश्न 7 पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को श्रद्धा भाव से देखा जाता है।

उत्तर- ‘मेरे संग की औरतें’ पाठ में परंपरागत तरीके से जीते हुए भी लीक से हटकर जीने वाली औरतों के जीवन की घटनाओं से सिद्ध होता है कि वे भी अपना सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करती हैं। उनके जीवन की विशेषताएं, आम आदमी को भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं। जैसे, सदा सच बोलने की विशेषता, अटल इरादों पर रहने की विशेषता, मन में किसी भी प्रकार की हीन भावना न पनपने देने की विशेषता

ये सभी विशेषताएँ सभी इंसानों को श्रद्धाभाव युक्त  जीवन जीने का सबक देती हैं।

प्रश्न 8. “सच अकेलेपन का मजा ही कुछ और है- इस कथन के आधार पर लेखिका की बहन एवं लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

 उत्तर- सच अकेलेपन का मजा ही कुछ और है लेखिका का यह कथन अक्षरशः सत्य है। यहाँ ‘अकेलेपन’ का अर्थ है अनावश्यक दबाव रहित स्वतंत्रता लेखिका की बहन रेणु अपनी इच्छा की स्वयं मालकिन है।

वह जब कभी जो कुछ मन में ठान लेती है उसे पूरा करके ही रहती है। उदाहरण के लिए, एक दिन तेज वर्षा के कारण सड़क पर कोई वाहन नहीं निकला। उस दिन रेणु की स्कूल बस भी उसे लेने न पहुँच सकी रेणु पैदल ही स्कूल पहुँच गई। स्कूल अत्यधिक वर्षा के कारण बंद था। इतनी दूर पैदल चलकर स्कूल पहुंचने पर उसे बंद पाकर वह तनिक भी खिन्न न हुई।

वह उसी भाव मुद्रा में वापस 2 मील पैदल चलकर अपने घर लौट आई। लेखिका को रेणु के साथ घटी यह घटना रोमांचित कर गई। लेखिका को लगा कि ‘सच अकेलेपन का मजा ही कुछ और है। अपनी ही धुन में मंजिल की ओर बढ़ते जाने का मजा ही अलग है।

मेरे संग की औरतें के कुछ और प्रश्न 

 

FAQ :

(1) मेरे संग कि औरतें क्या है?

उत्तर- यह एक संरमरण है

(2) मेरे संग कि औरते से हमें क्या शिक्षा मिलती है

उत्तर:-इस पाठ से यह शिक्षा मिलती है कि अपने परिवार जनों का सदा ही आदर करना चाहिए

(3) मेरे संग की औरतें पाठ के आधार पर बताइए कि कैसे इंसानों को श्रद्धा भाव से देखा जाता है

उत्तर. जो इंसान हमेशा,सत्य बोलता है, आत्मविश्वासी रहता ,ईमानदार रहता है

(4) मेरे संग की औरते पाठ के आधार पर लेखिका के भाई का क्या नाम था ?

उत्तर . राजीव

Read more…

साना साना हाथ जोड़ी

जॉर्ज पंचम की नाक