रीढ़ की हड्डी पाठ के प्रश्न उत्तर class 9

तो दोस्तों अगर आप भी class 9 के विद्यार्थी हैं और गूगल पर रीढ़ की हड्डी पाठ के प्रश्न उत्तर को ढूंढ रहे हैं तो आप बिलकुल ही सही पोस्ट पर आए हैं क्योंकि आज हमने इसी का जवाब दीया हैं….

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रीढ़ की हड्डी पाठ के प्रश्न उत्तर

रीढ़ की हड्डी पाठ के प्रश्न उत्तर class 9

अभ्यास

प्रश्न 1. रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद बात-बात पर “एक हमारा जमाना वा…” कराकर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं। इस प्रकार की तुलना करना कहाँ तक सर्कसंगत है?

उत्तर- ‘रीढ़ की हड्डी’ में बाबू रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद अपनी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे वैवाहिक संबंधों के अलावा अपनी बातों के बीच अपने पुराने जमाने को याद करते हुए उसे अच्छा बताते हैं। दोनों बातचीत करते हुए अपने समय को वर्तमान की तुलना में बेहतर कहते हैं।

हमारी दृष्टि में उन दोनों का अतीत और वर्तमान की तुलना करना कतई उचित नहीं है। यह तो सत्य है कि समय हमेशा परिवर्तनशील होता है। इसके चलते कभी भी कोई बात या स्थिति भी स्थिर नहीं होती है। समय-समय के अनुसार हर वस्तु-स्थिति, परिस्थिति में परिवर्तन होना संसार का नियम है

अतः यही उचित है कि समय के साथ होने वाले हर परिवर्तन को हम सहज रूप में स्वीकार करें।

प्रश्न 2. रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए छिपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवसता को उजागर करता है?

उत्तर- संकीर्ण मानसिकता एवं रूढ़िवादी परम्परा के चलते रामस्वरूप ने अपनी बेटी की उच्च शिक्षा को छिपाकर उसे मैट्रिक पास बताना, उसकी विवशता थी। लड़की का सम्बन्ध जोड़ने एवं उसे बनाए रखने के लिए रामस्वरूप को गोपाल प्रसाद एवं उसके बेटे शंकर के अनुसार चलना पड़ रहा था।

गोपाल प्रसाद जी अपने बेटे शंकर के लिए उच्च शिक्षित बहू नहीं चाहते थे। दूसरी ओर रामस्वरूप गोपाल प्रसाद के बेटे से अपनी बेटी का विवाह करना चाहते थे। इसलिए रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा को छिपा रहे थे।

प्रश्न 3. अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, यह उचित क्यों नहीं है?

उत्तर- गोपाल प्रसाद के बेटे शंकर से अपनी पुत्री उमा का रिश्ता करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा रखते थे, वह अनुचित था लड़की कोई भेड़-बकरी या मेज-कुर्सी नहीं जिसे किसी के भी हाथ बेच दिया जाए और वह अपनी कुछ भी क्रिया-प्रतिक्रिया प्रकट न करे।

उमा एक शिक्षित व समझदार, आधुनिक और स्वतंत्र विचारों वाली बेटी है। वह अपने जीवन में अपना भला-बुरा स्वयं सोच सकती है। यह भी मनपसंद वर पाने की हकदार है।

वह पददलित बन कर चुप-चाप दुख-दर्द सहन नहीं कर सकती। पति के साथ मुंह सिल कर या हीन ग्रंथि पालकर वह जीवन व्यतीत करने को तैयार नहीं है। अतः रामस्वरूप बेटी से जिस व्यवहार की अपेक्षा रखते थे, वह उचित नहीं था।

प्रश्न 4. गोपाल प्रसाद विवाह को ‘बिजनेस’ मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाते हैं। क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं? अपने विचार लिखें।

उत्तर- गोपाल प्रसाद का विवाह को बिजनेस मानना और रामस्वरूप द्वारा अपनी बेटी की उच्च शिक्षा को छिपाना अनुचित है। वे दोनों ही समान रूप में अपराधी है। गोपाल प्रसाद विवाह संबंधों और उसकी पवित्रता को महत्व नहीं देते हैं।

वे अपने व्यवसाय के चलते सौदा तय करने से पूर्व तरह-तरह की जाँच-पड़ताल कर लेना चाहते हैं। वे अपने आवारा बेटे की अच्छी कीमत वसूलने के लिए लोभित हैं। रामस्वरूप जी ने अपनी बेटी को उच्च शिक्षा तो दिलवाई परन्तु उसे छिपाकर वे अपनी विवशता प्रकट करते हैं।

उनके द्वारा ऐसा करना एकदम गलत है। उन्हें इस प्रकार के संबंध को जोड़ने में पहल ही नहीं करनी चाहिए, जिसमें उनकी बेटी किसी आवारा मनचले युवक के पल्ले बंधकर कभी सुख-चैन ना पा सके। अपनी बेटी को शिक्षा दिलवाकर उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है जिसे छिपाया जाए। वे व्यर्थ ही अपराध-बोध से ग्रस्त हैं।

प्रश्न 5. आपके लाड़ले बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं… उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है?

उत्तर-. आपके लाड़ले बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं,उमा के इस कथन से गोपाल प्रसाद के बेटे की दो तरह की कमियां सामने आती हैं एक, शंकर एक चरित्रहीन युवक है। वह गर्ल्स हॉस्टल में लड़कियों के इर्द-गिर्द आवारागर्दी करता हुआ पकड़ा गया था। तब उसने नौकरानी के पैरों पड़कर माफी मांगी थी तब कहीं जाकर उसकी जान छूटी थी।

इस प्रकार उसमें चारित्रिक दृढ़ता का न होना उसे रीढ़ से हीन सिद्ध करता है। दूसरे, शंकर शारीरिक रूप से भी विकलांक है। वह तनकर सीधा नहीं बैठ सकता है। गोपाल प्रसाद रामस्वरूप से बातें उसे बीच-बीच में तनकर बैठने का निर्देश भी देते हैं।

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प्रश्न 6. शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की-समाज को कैसे व्यक्तित्व की जरूरत है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर- ‘रीढ़ की हड्डी’ पाठ में लेखक जगदीश प्रसाद गुप्त ने समाज के उन लोगों पर करारा निशाना साधा हैं जिनके दिल में स्त्री समाज के प्रति कोई सम्मान या आदर भाव नहीं है।

गोपाल प्रसाद जैसे व्यक्ति उनमें मुख्य है किंतु उनका पुत्र शंकर और रामस्वरूप भी उनके पक्ष में चुप्पी साधकर समर्थन जताते हैं। समाज को ऐसे लोगों की कोई आवश्यकता नहीं है। शंकर चरित्रहीन, दब्बू व्यक्तित्व वाला मनुष्य है।

यह शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर है। इस तरह वह समाज में उपेक्षित माना जा सकता है, जिसका समाज में कोई स्थान नहीं है। आज समाज की उमा जैसे व्यक्तित्व की आवश्यकता हैं उमा शिक्षित, संस्कारित एवं स्वतंत्र विचारों वाली लड़की है। उसमें साहस के साथ ही स्पष्टवक्ता होने का गुण भी है। उसमें समाज के तथाकथित ठेकेदारों की कलई खोलकर उन्हें ‘आईना’ दिखाने का साहस है।

प्रश्न 7. ‘ रीढ की हड्डी ‘ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर—जगदीश प्रसाद ‘गुप्त’ जी के एकांकी रीढ़ की हड्डी’ का यह नाम एकदम सटीक एवं युक्तिसंगत है। शरीर रोड़ की हड्डी का महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ उसे सीधा रखती है। यही स्थिति समाज की भी है। शंकर जैसे व्यक्तियों के पास स्वयं का तो कुछ होता नहीं है।

वे केवल दूसरों के इशारों पर ही नाचते रहते हैं। आज भी समाज में अनेक शंकर जैसे हीन व्यक्तित्व हैं जो समाज का भला करने में असमर्थ है। इसलिए यह शीर्षक समाज की मुख्य भावना को व्यक्त करने में पूर्णतः समर्थ है।

प्रश्न 8 कथावस्तू के आधार पर आप किसे एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं और क्यों

उत्तर- कहानी की शुरूआत में उमा भले ही हमें गौण पात्र दिखाई देती है, परन्तु अन्त में जाकर हमें आभास होता है। कि वही इस एकांकी की मुख्य पात्र और एकांकी की सूत्रधार है।

उमा के माध्यम से ही लेखक अपनी वाणी को प्रभावी ढंग से मुखरित कर पाया है। उमा के माध्यम से उजागर संदेश स्वयं लेखक का है। उमा अपने सशक्त व्यक्तित्व का परिचय देकर अन्य पात्रों पर हावी हो जाती है।

प्रश्न 9. एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएं बताए।

उत्तर-एकांकी में प्रस्तुत गोपाल प्रसाद व रामस्वरूप का वार्तालाप स्वयं ही उनके चरित्र को उजागर करता चला जाता है। इस तरह उनके चरित्र की कुछ विशेषताएं हमें इस प्रकार देखने-सुनने को मिलीं--रामस्वरूप – यह यक्ति दब्बू व अविवेकी किस्म का व्यक्ति है। माना कि वह लड़कियों की शिक्षा का पक्षधर है। इसीलिए उसने अपनी पत्नी द्वारा विरोध करने के बावजूद अपनी बेटी उमा को खूब पढ़ाया-लिखाया,

परन्तु उमा का शंकर से रिश्ता करने के लालच में वह अपनी शिक्षित बेटी को अशिक्षित बताकर अपनी विवशता प्रकट करता है। उसमें साहस की कमी के साथ ही अविवेकी होने का गुण भी विद्यमान है। यह गोपाल प्रसाद की कुतकों बातों का अविरोध समर्थन करता है। गोपाल प्रसाद – गोपाल प्रसाद दकियानूसी विचारों का और बड़ा ही घाघ किस्म का व्यक्ति है। उसकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क है। यह विवाह जैसे पवित्र रिश्ते को भी व्यापारिक दृष्टि से देखता है तभी वह इसके लिए ‘बिजनेस’ शब्द का प्रयोग करता है।

वह अपने पुत्र की कमियों पर कुतर्क प्रस्तुत कर पर्दा डालता है। उसमें किसी भी प्रकार सच्चाई को जानने-सुनने का साहस नहीं है वह तर्कशील भी है जैसे, “मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।” आदि-आदि ।

प्रश्न 10. इस एकांकी का क्या उद्देश्य है? लिखिए।

उत्तर- जगदीश प्रसाद ‘गुप्त’ जी द्वारा विरचित इस एकांकी का मुख्य उद्देश्य विवाह योग्य लड़कियों की आवाज को बुलंद करना रहा है। इस एकांकी के माध्यम से लेखक समाज में स्त्रियों के प्रति व्याप्त संकीर्ण एवं तुच्छ विचारधारा को समाप्त करना चाहता है। लेखक अपने एकांकी के माध्यम से लड़कियों की शिक्षा पर बल देता है। समाज में चरित्रहीन लोगों की कलई खोलता है। उनके व्यर्थ के दंभ को उमा के माध्यम से तोड़ता है।

वह पुरुष की ही भांति स्त्रियों के स्वतंत्र व्यक्तित्व का पक्षधर है वह समाज में स्त्रियों की दशा को भेड़-बकरियों या बेजान चीजों की सी नहीं मानता है। इसीलिए वह उमा के माध्यम से अपना पक्ष प्रस्तुत करता है। उमा लड़कियों के स्वतंत्र व्यक्तित्व की रक्षा करती है।

प्रश्न 11. समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु आप कौन-कौन से प्रयास कर सकते हैं।

उत्तर- आज के समाज में स्त्रियों की दशा पहले से काफी सुधरी है। फिर भी समाज में उन्हें पहचान, गरिमा एवं अस्तित्व दिलाने के लिए हम ये प्रयास कर सकते हैं-

1. हम समाज के सभी क्षेत्रों में महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व पाने के संघर्ष में उनका सहयोग कर सकते हैं।

2. हम अपने घर-परिवार में महिलाओं को सम्मान देकर समाज में भी सम्मान दिलाने में सहयोग कर सकते हैं।

3. हम दहेज न लेने का प्रण कर सकते हैं।

4. उन्हें विभिन्न कार्य-क्षेत्रों में काम दिलवा कर उनके अधिकारों की रक्षा करने में सहयोग कर सकते हैं।

5. उन्हें पारिवारिक सम्पत्ति में भी समानाधिकार दिलाने में सहयोग करके उन्हें आर्थिक सुरक्षा दिलवा सकते हैं।

6. उनका दैहिक व मानसिक शोषण करने वालों का विरोध करके उनके चरित्र की रक्षा करने में सहयोग कर सकते हैं। 

रीढ़ की हड्डी पाठ के प्रश्न उत्तर class 9 के कुछ और प्रश्न 

FAQ :

(1)रीढ़ की हड्डी का प्रमुख पात्र क्या है?

उत्तर: इस एकाकी में कुल छ: पात्र है लेकिन मुख्य पात्र रामस्वरूप है

(2) रीड की हड्डी का क्या उद्देश्य है

उत्तर: समाज में होने वाली स्त्रियो के प्रति असहज सोच को समाप्त करना

(3) इस एकाकी का क्या उदेश्य है

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य समाज मे स्त्रीयों की स्थिति को सुधारना है।

(4) रामस्वरूप अपनी बेटी उमा की उच्च शिक्षा क्यों छिपाते है रीढ़ की हड्डी एकाकी के आधार पर स्पष्ट कीजिए?

उत्तर. ताकि उसकी बेटी का विवाह शंकर से हो सकें।

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