Bas Ki Yatra Class 8 Solutions II Ncert Book

तो दोस्तो अगर आप भी क्लास 8th के छात्र हैं और गूगल पर।  Bas Ki Yatra के प्रश्न उत्तर ढूंढ़ रहे हैं तो आप बिलकुल ही सही पोस्ट पर आ चुके हैं तो चलिए शुरु करते हुए

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Bas Ki Yatra

Bas Ki Yatra Class 8 Solutions II Ncert Book

MCQ

1) बस में कितने मित्र सवार हुए?

(a) चार 

(b) पाँच 

(c) छः 

(d) कोई नहीं

उत्तर-(b)

2) कितने लोगों को सुबह काम पर हाजिर होना था ?

(a) दो 

(b) तीन

(c) चार

(d) इनमें कोई नहीं 

उत्तर- (a)

3) बस जबलपुर की ट्रेन के लिए किस स्थान में पहुँचा देती है?

(a) पन्ना 

(b) सतना 

(c) कानपुर 

(d) पटना 

उत्तर-(b)

4) ‘बस की यात्रा’ शीर्षक पाठ कैसी रचना है?

(a) मनोवैज्ञानिक

(b) हास्य व्यंग्यात्मक

(c) निबंधात्मक

(d) आत्मकथात्मक

उत्तर-(b)

5) यातायात की दुर्व्यवस्था किस पाठ की विषय वस्तु है?

(a) क्या निराश हुआ जाए

(b) हुंडरू का जल प्रपात

(c) बस की यात्रा

(d) पथ की पहचान

उत्तर-(c)

6) हास्य-व्यंग्यात्मक रचना की श्रेणी में कौन-सा पाठ है-

(a) अपराजिता

(b) अशोक का शस्त्र त्याग 

(c) बस की यात्रा

(d) छोटा जादूगर

उत्तर-(c)

7) बस के प्रति श्रद्धा का कारण था

(a) सुन्दर होना

(b) वयोवृद्ध होना

(c) आकर्षक होना

(d) इनमें कोई नहीं

उत्तर-(b)

8) ‘बस की यात्रा” पाठ के आधार पर लेखक को लोगों ने शाम वाली बस से सफर न करने की सलाह क्यों दी?

(a) बस की दुर्दशा से परिचित थे

(b) बस चल नहीं पा रही थी 

(c) बस भुतहा थी

(d) बस में लाइट नहीं थी 

उत्तर- (a)

9) ‘बस की यात्रा” शीर्षक पांठ में लेखक हर पेड़ को अपना दुश्मन क्यों समझ रहा था? 

(a) क्योंकि बस पेड़ से न टकरा जाए

(b) क्योंकि बस नाले में न गिर जाए 

(c) क्योंकि बस रूक न जाए

(d) क्योंकि बस बंद न हो जाए

पाठ से 

1. लेखक ने उस बस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ श्रद्धाभाव से क्यों देखा ?

उत्तर- जब बस पुलिया के ऊपर पहुँची तब उसका एक टायर पंचर हो गया। तब लेखक ने हिस्सेदार की तरफ श्रद्धा भाव से देखा कि अपनी बस की स्थिति जानते हुए भी वे बस से सफर कर रहे हैं। उन्होंने उनके साहस और बलिदान की भावना को श्रद्धाभाव से देखा ।

2. लेखक को लोगों ने शाम वाली बस से सफर न करने की सलाह क्यों दी ?

उत्तर- लेखक को लोगों ने शाम वाली बस से सफर न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा समझदार लोग शाम वाली बस से सफर इसलिए नहीं करते हैं ताकि रास्ते में कहीं बस खराब न हो जाए और पूरी रात बर्बाद हो जाए अर्थात् बस डाकिन है।

3. लेखक को ऐसा क्यों लगा कि सारी बस ही इंजन है और वह।इंजन के भीतर बैठा है ? 

उत्तर- जब ड्राइवर ने इंजन स्टार्ट किया तो सारी बस हड़ हड़ करने लगी। उसे ऐसा लगा कि वह बस में नहीं इंजन के भीतर बैठा है। 

4. लेखक को तब हैरानी क्यों हुई जब कंपनी के हिस्सेदार ने बताया कि बस अभी अपने आप चलेगी ?

उत्तर- लेखक ने जब बस के बारे में जानकारी ली कि क्या यह बस चलती तब हिस्सेदार ने बताया, चलती क्यों नहीं जी, अभी चलेगी। अपने आप चलेगी। अब लेखक की हैरानी हुई कि क्या बस अपने आप चलती है।

5. लेखक हर पेड़ को अपना दुश्मन क्यों समझ रहा था ?

उत्तर- लेखक को डर लग रहा था कि यह बस किसी पेड़ में टकरा न जाए। इसलिए वह हर पेड़ को दुश्मन समझ रहा था जो दुर्घटना में जान ही ले लेगा।

पाठ से आगे :

1. सविनय अवज्ञा के बारे में पता कीजिए। प्रस्तुत पाठ में व्यंग्यकार ने सविनय अवज्ञा का उपयोग किस रूप में किया है ?

उत्तर- गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया था। 1935 में भारत शासन अधिनियम के विरोध में गाँधी जी ने संपूर्ण भारतीयों को शामिल कर अंग्रेजों की बात न मानने के लिए एकजुट किया। बस के सभी हिस्से उसका विरोध कर रहे थे। इसी को व्यंगकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू की बात कहकर व्यंग्य किया है।

2. आपने यात्रा अवश्य की होगी। अपनी किसी यात्रा के खट्टे-मीठे अनुभवों को लिखें।

उत्तर- आप खुद से लिखे

3. क्या पुराने वाहनों को सड़को पर चलाना उचित है? पुराने वाहन ‘वातावरण को किस प्रकार नुकसान पहुँचाते हैं ? 

उत्तर-पुराने वाहनों को सड़कों पर चलाना अनुचित है। सरकार ने भी इसपर प्रतिबंध लगा दिया है। पुराने वाहन से धुंआ निकलता है। उससे वायु प्रदूषण होता है। पुराने वाहन आवाज करते हैं, जिससे ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। ये वातावरण को प्रदूषित कर नुकसान पहुँचाते हैं।

अनुमान और कल्पना : 

1. यदि बस बोल सकती तो वह अपनी बुरी हालात और भारी बोझ के कष्ट को किन शब्दों में व्यक्त करती ? लिखिए।

उत्तर- बस चीख-चीखकर कहती मेरी बॉडी बनवाओ। खिड़की में शीशे डलवाओ। इंजन की सर्विसिंग करा दो। सवारी इतनी दुस-दूस के न बिठाओ। टायरों को नया लगा दो। आदि।

2. लेखक को बस की यात्रा में हमेशा अपना जीवन संकट में लगा। मगर अंत में उसकी बेताबी और तनाव खत्म हो जाते हैं। बताइए कि लेखक की चिंता क्यों खत्म हो गई जबकि उसकी परिस्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है ?

उत्तर- लेखक को जीवन जाने का भय सदा यात्रा में लगा रहा। अंत में उसे लगा कि अब पन्ना वह समय पर नहीं पहुँच पायेगी। अतः वह उम्मीदीन हो गया। उसकी बेतावी, तनाव सब खत्म हो गए।

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