Chaitrra Navratri Wisnes in Hindi 2024 : मातारानी का आगमन

chaitrra navratri wisnes in hindi को इस पोस्ट पर जानने वाले है साथ ही इस पोस्ट चैत्र नवरात्रि से जुड़े और भी जानकारी मिलने वाला है इस लिए इस पोस्ट पर अंत तक बने रहे

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Chaitrra Navratri Wisnes in Hindi 2024 : मातारानी का आगमन

चैत्र नवरात्रि क्या है

चैत्र नवरात्रि के पवित्र पवित्र दिन म दुर्गा को समर्पित करते है इन नव दिनों मे देवी के अलग -अलग तरिके अवम स्वरूपों की पूजा होती है और इन्हे फल -फूल ,कई तरह के मिठान और अलग अलग तरह पकवान से भोग लगाए जाते है था कहा जाता है कि चैत्र नवरात्रि मे मन और सचि लगन से व्रत – उपासना करने वालों को मे दुर्गा से मन छह वरदान मिल सकता हैं

Chaitrra Navratri Wisnes in Hindi

दुर्गा चालीसा

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।

नमो नमो दुर्गे दु:ख  करनी॥

निरंकार है ज्योति तुम्हारी।

तिहूं लोक फैली उजियारी॥

शशि लालट मुख महावीशाल।

नेत्र लाल भूकुटी विकराला॥

रूप मातु को आधीक सुहावे।

दशत करन जन अति सुख पावे॥

तुम संसार शक्ति लेे किना।

पागल हेतु अन्न धन दिन॥

अन्नपुणा हुई जग पल।

तुम ही आदी सुन्दर बाला॥

प्रयकाल सब नाशन हारी।

तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावे।

ब्रह्म विष्णु तुम्हें धीयवे ॥

रूप सरस्वती को तुम धारा ।

दे सुबुद्धि ऋषि मुनीन उबारा ॥

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा ।

परगट भई फाड़कर खंबा ॥

रक्षा करी प्रह्लाद बचाओ ।

हरिणीयअक्ष को स्वर्ग पथायो ॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं ।

श्री नारायण अंग समाहीं ॥

क्षीरसिंधु में करत विलासा ।

दयसिंधु दीजै मन आसा ॥

हिंगलाज में तुम्ही भवानी ।

महिमा अमित न जात बखानी ॥

मांतनगी अरु धूमावती माता ।

भुवानेश्वरी बंगला सुख दाता ॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी ।

छिन्न भाल भव दुख निवारिणी ॥

केहरी वाहन सोह भवानी ।

लांगुर वीर चलत अगवानी ॥

कर में खप्पर खंडग विराजे ।

जाको देख काल डर भाजै ॥

सोहै अस्त्र और त्रिशूला ।

जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥

नगरकोट में  तुम्ही विराजत ।

तीनहुलोक में डंका बाजत ॥

शुंभ निशुनभ दानव तुम मारे ।

रक्तबीज शंखन संहारे ॥

दुर्गा जी कि आरती

आइए दोस्तों अब चलिए जानते हैं माँ दुर्गा जी कि आरती को जिसे पढ़ने के बाद आपका भी मन स्थिर हो जाएगा

ॐ जी अम्बे गौरी

जय अम्बे गौरी ,मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन द्यावत ,हर ब्रह्म शिवाई ॥

ॐ जय अम्बे गौरी…

मांग सिंदूरत विराजत ,टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोऊ नैना ,चंद्रवंदन निकों ॥

ॐ जय अम्बे गौरी ….

कनक समान कलेवर ,रकताम्बर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला ,कांठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी ..॥

केहरि वाहन राजत ,खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर मुनिजन सेवत ,तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

कानन कुंडल शोभित ,नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर ,सम राजत ज्योति ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

शुभ-निशुमभ बिदारे ,महिषासुर घाती ।

ध्रूम विलोचन नैना ,निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी …॥

चंद-मुंड संहारे ,शोणित बीज हरे ।

मधू – कैटभ दोऊ मारे, सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी …॥

ब्राह्यनी ,रुद्राणी ,तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी ,तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी …॥

चौसठ योगिनी मंगल गावत ,नृत्य करत भैरों ।

बाजत ताल मृदंगा ,अरु बाजत डमरू ॥

ॐ  जय अम्बे गौरी…॥

तुम ही जग कि माता ,तुम ही ही भाता ।

भक्तन कि दुख हरता ,सुख संपती करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी …॥

भुजा चार अति शोभित ,खड्ग खप्पर धारी ।

मनवांछित फल पावत ,सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी…॥

कंचन थाल विराजत ,अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु मे  राजत ,कोटी रतन ज्योति ॥

ॐ जय अम्बे गौरी …॥

श्री अंबेजी कि आरती ,जो कोई नर गावे।

कहत शिवानंद स्वामी ,सुख-संपती पावे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी …॥

जय अम्बे गौरी ,मैया जय श्यामा गौरी ।

अंतिम शब्द

तो साथियों आज के इस शानदार पोस्ट पर हमने आपको चैत्र नवरात्रि से जुड़े जानकारी को आपके समक्ष साझा किए तो अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा तो इस पोस्ट कोई जरूर ही शेयर करें